भारतीय किसान यूनियन एकता की तरफ से गुरुद्वारा गुरु की ढाब में मीटिंग की गई

फरीदकोट(विपन मितल)-भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां की तरफ से भूजलस्तर को गिरने से बचाने के लिए बीते दिन मीटिग सूबा सीनियर उपाध्यक्ष झंडा सिंह जेठूके की अध्यक्षता में गुरुद्वारा गुरु की ढाब में की गई।इस मौके पर जिला और ब्लाक नेताओं ने कहा कि पंजाब सरकार की तरफ से धान की सीधी बिजाई के लिए एक तरफा एलान किया है। 1500 रुपये रिस्क भत्ता काफी नहीं है। यदि यह दस हजार रुपये प्रति एकड़ होता जिससे किसानों के काफी बड़े हिस्से ने सीधी बिजाई की तरफ आकर्षित हो जाना था। इसके अलावा पंजाब सरकार की तरफ से मूंग की दाल, बासमती और मक्का की सरकारी खरीद का केवल एलान किया गया है परंतु कानूनी गारंटी नहीं दी गई, बासमती का कोई एमएसपी भी नहीं माना गया। इस मौके मांग की गई कि पीछे के धान वाले किसानों को बनता उत्साही भत्ता दिया जाए। मीटिग में सर्व सम्मति से मांग की गई कि धान की जगह सभी दालें, सब्जियां, बासमती, मक्का, तेल-बीज, फलों तथा अन्य कम पानी की उपभोग वाली फसलों के लाभकारी मूल्य का सी-2 50 प्रतिशत फार्मूले अनुसार मान कर मुकम्मल खरीद की लिखित गारंटी दी जाये। सभी वक्ताओं ने जोर दिया कि सरकार किसान जत्थेबंदियों के साथ मिल बैठ कर समस्या का तसल्लीबख्श हल निकाले। उन्होंने कहा कि इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए मांग की गई है कि भू-जल-भंडार की फिर भराई के लिए बरसाती पानी और सीवरेज के पानी को साफ करके सिचाई के लिए प्रयोग में लाने और अन्य वैज्ञानिक ढंग तरीके अपनाने के लिए पंजाब सरकार की तरफ से ढांचा उसारी की जाये। इसके लिए जरूरी बजट के लिए धन-जुटाया जाये। यह बात स्वीकृत की जाये कि भू-जल-भंडार की सतह गिरने के आरोपी किसान नहीं बल्कि हरे इंकलाब का माडल मढ़ने वालों सामराजी ताकतों और उन की हाथ खिलौना बनीं हुई सरकारें ही हैं। बड़ी आपदाओं को सुनहरी मौका समझने वाली नीति के अंतर्गत संसार बैंक, केंद्रीय हकूमत और प्रांतीय सरकारों की मिलीभगत के द्वारा पानी को व्यापारिक वस्तु आरोप लगा कर दरियाओं-नहरों और घरेलू जल सप्लाई के कारोबारों को निजी कारपोरेटों के हवाले करने की लोग-मारू स्कीमों को रद किया जाए। गांवों शहरों के पीने वाले पानी की जल सप्लाई व्यवस्था के निजीकरण की तरफ बढ़ाए कदम रद कर इस को फिर सरकारी कंट्रोल में लेने का कानून बनाया जाये और समूह ठेका कामगारों को पक्के करने के अलावा जरूरी अन्य कामगारों की पक्की सरकारी भर्ती की जाये।

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